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बिहार में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया विस्तार, हर जिले के अस्पतालों में बनेंगे अलग वार्ड

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पटना: बिहार में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण और व्यापक निर्णय लिया है। अब राज्य के सभी जिलों के सदर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में मानसिक रोगियों के लिए अलग से विशेष वार्ड स्थापित किए जाएंगे। इस फैसले का उद्देश्य मरीजों को उनके ही जिले में समुचित इलाज उपलब्ध कराना और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देना है।
अब तक मानसिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को अक्सर इलाज के लिए राज्य से बाहर या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। कई मामलों में उन्हें रांची जैसे स्थानों पर जाना पड़ता था, जिससे मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सरकार के इस नए फैसले से अब ऐसी परेशानियों में कमी आने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह पहल केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मरीजों के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और समाज कल्याण विभाग के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि मरीजों को उपचार के बाद सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सके।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि राज्य सरकार मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए बहुआयामी योजना पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में अलग वार्ड बनाए जाने के साथ-साथ प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्टाफ की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।
सरकार ने यह भी तय किया है कि सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में मनोचिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी। जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, वहां नए पद सृजित कर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। अभी तक कई अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पाता था, जिसे अब दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
यह निर्णय न्यायिक निर्देशों के बाद लिया गया है। पटना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को मानसिक रोगियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया था। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई थी कि राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं अपेक्षाकृत कमजोर हैं, जबकि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में करीब एक लाख लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं के लिए अस्पतालों में परामर्श लिया है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि मानसिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी भी एक बड़ी समस्या है। कई बार परिवार और समाज मानसिक रोगियों को समझने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे उनकी स्थिति और खराब हो जाती है। ऐसे में इलाज के साथ-साथ जागरूकता बढ़ाना भी बेहद जरूरी है।
मनोचिकित्सकों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में मानसिक रोगों के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेष रूप से कोरोना महामारी के बाद लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा है। लंबे समय तक घरों में रहने, सामाजिक दूरी, आर्थिक अनिश्चितता और लगातार डिजिटल माध्यमों के संपर्क में रहने से तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ी हैं।
आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई प्रकार की बीमारियां सामने आ रही हैं। इनमें अवसाद, अत्यधिक चिंता, भय, व्यवहार संबंधी विकार, एकाग्रता की कमी, डिमेंशिया और नशे की लत जैसी समस्याएं शामिल हैं। यदि इनका समय पर इलाज नहीं किया जाए, तो ये गंभीर रूप ले सकती हैं और मरीज के सामान्य जीवन को प्रभावित कर सकती हैं।
सरकार का मानना है कि जिला स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध होने से मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा। इससे न केवल उनकी हालत में सुधार होगा, बल्कि परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम होगा। दूर-दराज के शहरों में जाने की आवश्यकता समाप्त होने से समय और संसाधनों की भी बचत होगी।
इसके अलावा, अलग वार्ड बनने से अस्पतालों में मानसिक रोगियों के इलाज के लिए एक समर्पित और व्यवस्थित व्यवस्था तैयार होगी। इससे डॉक्टरों को भी बेहतर तरीके से मरीजों का इलाज करने में सुविधा होगी और मरीजों को एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिलेगा।
प्रशासनिक स्तर पर इस योजना को लागू करने के लिए सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक संसाधन जुटाने और बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए कहा गया है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस योजना का लाभ राज्य के हर हिस्से तक पहुंचे।
सरकार की इस पहल को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इससे मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों की सोच में भी बदलाव आने की उम्मीद है। अब यह केवल एक उपेक्षित विषय नहीं रहेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।
इस फैसले के लागू होने के बाद आने वाले समय में राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है। मरीजों को बेहतर इलाज के साथ-साथ सामाजिक पुनर्वास की सुविधा मिलने से उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

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